मै भोपाल मध्यप्रदेश से ,मेरी तीन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं..."वो नीम का पेड़" "हिन्दी और सिनेमा" एवं "हम तिरंगा लेकर आऐंगे."बाल कविता संग्रह

हां नारी हूं मैं..!
लेकिन
हे पुरुष
तुम्हारे बिना
अधूरी हूं मैं..!!

सीमा शिवहरे सुमन

आत्म- मुग्धता से जरा सा
बाहर निकल बंदे
जो खुद कह के लिखवाईं
वो कभी तारीफें नहीं होती....

सीमा शिवहरे सुमन

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जिसे देते हुए
हाथ तेरे कभी न रुके...
वो छीन कर हक तेरा
देखना है आखिर
कब तलक मुस्कुराएगा...?

सीमा शिवहरे सुमन

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या खुदा ..!
मेरी खामोशियों को
सुनने वाला भी कोई
दुनिया में बनाया होता !
तो ये भी कोने में बैठी
आज बातें कर रही होती !!

सीमा शिवहरे सुमन

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एक कड़वा सच कई विरोधियों की..
एक मीठा झूंठ कई चापलूसों की...
कतारें हमारे पीछे लगाता आया है!
ऐ खुदा तेरी दुनिया में सच्चे इंसान
कहां खो गए ?


सीमा शिवहरे सुमन

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इतनी शिद्दत से
याद किया किसने ?
कि हिचकियां
बगावत पे
उतर आईं हैं!!

सीमा शिवहरे सुमन

टूटे ख्वाबों की बोरियां भर लो
सितारों में मिलेंगे ना जब
हम मिलकर के तब जोड़ लेंगे.,.

सीमा शिवहरे सुमन

हम भी
टूटी आस को
रख देंगे किसी ताक पर
कहते हैं एंटिक चीजें
लाखों की कीमत
रखती हैं।

सीमा शिवहरे सुमन