lover by nature, writer by mind, singer by heart, indian by soul. जै श्री राम

कितनी सीढ़ियों, कितने तहखानो में उतरना पड़ता है..
जब कभी खुद से मुलाकात करना पड़ता है...

अजीब है....
ये मौसम भी इस कदर बेरुखी दिखा रहा है,
ना चाहते भी तुम्हारी याद दिला रहा है |

मुझे जन्मदिन की शुभकामनाएं देने के लिए आप सभी लोगों का हृदय से धन्यवाद

आप सभी लेखकों और पाठकों को होली की हार्दिक शुभकामनायें...

*फिर कभी साथ बैठो...*
*तो बयां दर्द भी हो...*

*अब यूँ दूर से पूछोगे...*
*तो ख़ैरियत ही कहेंगे !!!*

हद से ज्यादा आजादी ही बगावत की जननी है...

#आजादी

पहली बार जब आंखें खोलीं,
तुझको ही हंसता पाया,
कतरा कतरा सींचा तूने,
तब दुनिया में मैं आया,

कोई कीमत नहीं है जग में,
जो मां की ममता बेच सके,
और जिसने आंखें नम कीं ये,
क्या वो सुकूं से जी पाया??

#आंखें

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मेरे अपने भी पराए हो गए,
बस इस जरा सी बात पर,
जब मैंने उनसे अपना दिया हुआ वक्त वापस मांग लिया |

Sarvesh Saxena लिखित कहानी "दो बाल्टी पानी - 6" मातृभारती पर फ़्री में पढ़ें
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दो हिस्सों में बंट गए मेरे अरमान
कुछ तुझे पाने को निकले
कुछ मुझे समझाने को निकले