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"દુનિયા અલગ,વિશ્વ એક.", ને માતૃભારતી પર વાંચો :
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વાંચો, લખો અને સાંભળો અગણિત રચનાઓ ભારતીય ભાષાઓમાં, તદ્દન નિઃશુલ્ક!

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"સુલભ આરોગ્ય", ને માતૃભારતી પર વાંચો :
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ક્યારેક જીંદગી બધું આપે
ક્યારેક બધું જ લાઇ લે..
આ દરેક ઘટનામાં જીવન ઘૂંટાતું લખાતું જાય.


ये कोनसा तेल डालकर तूने दीप जलाया है !
ना पूरा जल रहा है सही तरीके से,
ना बुझ पता है अपने ढंग से।
ख़ाक नही होता,
राख नही होता।
बुजा बुजा सा अंदर ही अंदर जल रहा है
नाही आग काम आ रही है
नाही जलन कम हो रही हैं
कभी ज़्यादा जले, ऊँची आँच में तो काला करदे,
कभी अंदर ही अंदर सब भस्म कर दे।
ये कोनसा तेल डालकर तूने दीप जलाया है !

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चारों तरफ़ सन्नाटा छाएगा।
कुछ लोग अंदर ही अंदर बोलेंगें आवाज़ नही ।
जिनको बात मिली होंगी,
जिनके साथ तार जुड़ा होगा,
कुछ अपने होते पराये-
कुछ पराये अपने जिनको जैसा लगा
उतनी जल्दी भागेंगे।
कुछ लोग खाली हाथ,कुछ रस्म निभाएंगे।
कोई हर तकलीफ को करके पार
कोई बहाना बनाएंगे।
कुछ आँखे भीतर से नम, कुछ बातों से मनाएँगे
एक गहरी डोली एक खाली जोली।
उठाएंगे सब,बिछड़ ने का ग़म आज मुजे,
उतना वो तब नही मनाएँगे।
सब अधूरे वादे,सपनें, किस्से, कहानियां..
सब बिछाई और
शिर्फ़ तन जलाया जाएगा ।
क्योकि
अरमानों को तो कबका में जला बेठा ।

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