"આનંદ"..........

क्या मांग ले
महोबत से

फितरत
फना होना ऊसूल है

रिस्ता दर्द ए दिल
याराना होता है

कभी ग़म कभी खुशी
मन माना होता है

तदबीर काम आएगी
जरुर

तकदीर बनाने वाले
वाकई
हम ही तो है

ठुकरा दिए गए हैं
जिंदगी से

हर सांस के साथ
निभाते हैं याराना
मौत से

सही है या ग़लत
पता नहीं

मन से आर-पार
कभी देखा नहीं

देखता हुं दूर तक
कुछ
नज़र नहीं आता

आब का अंदाज़
सरे-आम है

हसरतों का बाजार गर्म है जिंदगी

यहां मनोरथों में सवार
लोग देखते हैं

तरोताजा फूलों की
खुशबू मिली

दिल ए यार बहुत खूब
मौज ए दिल
दिल्लगी
मिली

बड़ा पागलपन है
जहां

गल को पाया ही नहीं
यहां

हम रूठ भी जाए
तो क्या हुआ?

मनाही के दौर
गुजरे
वोह हंसी
सख्सियत है कहां?