Read My Story ... full of Fun and Humour "पहला घूँट" and please give your reviews

तुम्हारे देर तक जागने का सबब
और सुबह जल्दी उठने की पर्याय होता

काश मैं तुम्हारी चाहत न होकर
तुम्हारी गरमा गरम चाय होता ..✍️

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सुनो पिया
मेरी चाय क्यों नहीं बन जाते तुम
घुल जाओ रगो में मेरी,

पूरे के पूरे.....

मैं भी तुम्हे रोज़ कप भर,
तसल्ली से पियूंगीं

हर पल... हर पहर....
तुम्हे ही जियूंगीं

बस तुम ही तुम..

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आईने को देख,
चेहरा सोचता होगा...
पता नहीं क्या क्या दिखाता है.!!

और...चेहरे को देख,
आईना सोचता होगा...
पता नहीं क्या क्या छिपाता है.!!

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ख़्वाब" सी होती हैं..
कुछ "यादें"....

कुछ की "आँखों" में ही रहती
हैं...कुछ की "ज़िन्दगी" में

जब चाहो होठों से लग जाती है,
एक पल में उबल कर संभल जाती है,
दिल को जला कर भी सहला जाती है,
एक पल को ग़म सब भुला जाती है।

सुकूँ और ताजगी को एक साथ सँजोती है
असली महबूबा तो फिर चाय ही होती है।

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रात ख्वाबों के आंचल में बीती ,
सुबह पहली फुरस्त में तेरे ख़्याल आने लगे
चाय की प्याली ने यादों की गठरी खोली,
बीते लम्हें मुस्कुराने लगे..

कसूर मेरा नही रिमझिम मौसम की शरारत है
तुझ बेहद खास के साथ फिर चाय पीने की चाहत है

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खुश्क मौसमों की खिडकियों पर,
भीगे मौसम दस्तक देते रहे रात भर

रात भर बरसी, सुबह तक ठहरी रहीं,
इन बूंदों में मौजें, दबी बहुत गहरी रहीं

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बड़ी सँभाल कर खर्च करते हैं
तेरी यादों की दौलत...

आखिर एक उम्र गुजारनी है
इन्हीं की बदौलत...

बादलों का छाना
बूँदों का
बरस पड़ना
सामान्य सा
मौसमी बदलाव

किन्तु मेरी
सामान्य सी चाह
इतनी बड़ी
क्यों लगती है-

जब पहले
बादल घुमड़ें
पहली बूँदे पड़ें
पहली बार
मिट्टी भीगे तो
मैं भी भीगूँ
साथ तुम्हारे
और मुझसे उठी
सोंधी महक
तुम महसूस करो

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बादलों की मटरगश्ती और नम हवाओं की आवारगी में एक कलाम हो जाये

ऑनलाइन तुम भी मैं भी ... चाय हो और इनबॉक्स पर दुआ सलाम हो जाये

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