શબ્દોના પ્રેમમાં પડવાનો પ્રયાસ કરું છું.....

સ્ત્રી એટલે સમર્પણ ને પુરુષ એટલે વર્ચસ્વ,
આ સાંઠગાંઠથી જ નિખરતું રહે બંનેનું સહઅસ્તિત્વ...

दो पन्नो के बीच मोहब्बत दफन है,
उस गुलाब से पूछो किताबे कैसे बनती कफ़न है ।।

कुछ रिश्वत लेती जा ऐ जिंदगी,
तेरे उसूल तो जीने नही देते है ।।

लिखना अब फितरत बन गई है,
है आग अंदर वो महज़ लब्ज़ बन के रह गई है ।।

#दूरी

तुम साथ तो हो, लेकिन पास नही हो ,
कुछ दूरी तय करना नामुमकिन क्यों बन जाता है ?

#सजावट

इस चहेरे पर कोई सजावट नही है,
क्योंकि इस दिल मे कोई मिलावट नही है ।।