"બેનામ"

જ્યાં નથી વસાહતો એ તો કોઈના દિલ છે છતાં,
કેમ એ ગુમનામ પથ તરફ એ દોડી જતું હશે,

ના જાણે શાં શમણાં એને આજકાલ સતાવે છે,
"બેનામ" કેમ એ કંઈ બોલ્યા વગર જ દિલ રડી જતું હશે..

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वो समझें या ना समझें मेरे जजबात को,
मुझे तो मानना पड़ेगा उनकी हर बात को,

हम तो चले जायेंगे इस दुनिया से,
मगर आंसू बहायेंगे वो हर रात को......

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આંખો થી ઝરતા આંસુ માટે પાંપણ થી પાળ બાંધવી પડે છે,

અમસ્તું નથી લખાતું કંઈ બેનામ લાગણીઓને ઠાળવી પડે છે...

@ બેનામ

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माना सबकी नजरों में मैं खलता रहता हूँ,

फिर भी झुकता नहीं हूँ मै, चलता रहता हूँ।

@बेनाम

महोबत का घना बादल बना देता तो अच्छा था,
मुझे उस आंख का काजल बना देता तो अच्छा था,

उसे पाने की ख्वाहिश अब मुझे जीने नहीं देती,
खुदाया तू मुझे पागल बना देता तो अच्छा था।

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घाव हैं कुछ पुराने जो कभी भरते ही नहीं है
उन जख्मो पर अश्कों को मलता रहता हूँ।


चाहे तोड़ दो डाली से या खुशबू लूट लो
मेरी फितरत हैं फूल सी, मैं खिलता रहता हूँ।

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लगी आग उलफत की दोनो के दिल में, ईधर धीरे धीरे उधर धीरे धीरे,

तुम्हारी महोबत में हम मर मिटेंगे, मगर तुमको होगी खबर धीरे धीरे।

@अज्ञात

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मजबूरियों से लड़कर रिश्तों को समेटा है,

कौन कहता है मुझे रिश्तें निभाने नहीं आते।

@अज्ञात

सुलगती रेत पर पानी की अब तलाश नहीं,

मगर ये कब कहा हमने की
हमें प्यास नहीं।

@अज्ञात